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Rajasthan GK

बिजोलिया किसान आंदोलन Bijolia Kisan Movement | Rajasthan GK Notes

⛏यह आन्दोलन *1897-1941* तक चला  इसे भारत का *पहला अहिंसात्मक किसान आंदोलन* माना जाता है यह राजस्थान का *प्रथम संगठित किसान आंदोलन* था  बिजोलिया वर्तमान में *भीलवाड़ा* जिले में उसकी से इसे *ऊपरमाल की जागीर गांव*कहा जाता था   इस जागीर का संस्थापक *अशोक परमार*था जो *1527 के खानवा युद्ध* में राणा सांगा की ओर से लड़ने गया था
⛏ इस आंदोलन के 
*प्रणेता साधु सीताराम दास* से उन्होंने इस आंदोलन का *नेतृत्व*किया था यह आंदोलन *धाकड़ किसानों*द्वारा किया गया था इस आंदोलन की *शुरुआत 1897 में गिरधरपुरा गांव* में हुई थी जब किसानों के दो प्रतिनिधि *नानजी पटेल और ठाकरी पटेल मेवाड़ महाराणा फतेह सिंह* से मिलने उदयपुर गए थे
⛏ *1903 मे बिजोलिया के ठाकुर कृष्ण सिंह/किशन सिंह* की ने किसानों पर *चँवरी* नामक नया कर लगा दिया था इसके अंतर्गत किसानों को अपनी लड़की के विवाह पर *5रू (13 रुपए) ठिकाने  में जमा*करवाने पड़ते थे
⛏ नये राव पृथ्वी सिंह ने *1906* में किसानों पर *तलवार बंधाई (उत्तराधिकार शुल्क) और घुडपडी कर* लगा दिया  पृथ्वी सिंह के समय *मेवाड में 84 प्रकार की लागबाग लागत (लगान के अतिरिक्त शेष कर)* प्रचलित था
⛏ इस लागबाग लागत का *साधु सीताराम दास फतेहकरण चारण व ब्रह्मदेव ने 2 साल तक विरोध* किया और कोई कर नहीं दिया  1914 में सीतारामदास ने *विजय सिंह पथिक* को बिजोलिया आमंत्रित किया था *1914 में चित्तौड़ में विद्या प्रचारिणी सभा*का अधिवेशन हुआ था इस *सभा में विजय सिंह पथिक और हरिबाई किंकर* भाग लेने आए थे
⛏ *विजय सिंह पथिक1916*में इस आंदोलन से जुड़ गए थे

  • विजय सिंह पथिक का *वास्तविक नाम भूपसिंह* था 
  • यह बुलंदशहर के निकट *गुठावली*के रहने वाले थे
  • इन्हें *21 फरवरी 1915* को प्रस्तावित क्रांति में *अजमेर क्षेत्र में क्रांति करने*की जिम्मेदारी दी गई थी
  • क्रांति का *भंडाफोड़* होने के कारण *भूपसिंह को गिरफ्तार कर टाडगढ़ (ब्यावर)के किले* में नजर बंद कर दिया गया था
  • यहां से फरार हो कर इन्होंने *अपना नाम विजय सिह पथिक* कर लिया

⛏ *बिजोलिया आंदोलन* को गति देने के लिए पथिक ने *1917 में बिजोलिया में उपरमाल पञ्च बोर्ड* का गठन किया था जिसका *पहला सरपंच मन्ना पटेल*को बनाया गया था   *कानपुर* से प्रकाशित होने वाले *प्रताप नामक समाचार पत्र*के माध्यम से पथिक ने इस आंदोलन को *देशभर में चर्चित*कर दिया था 
⛏ महात्मा गांधी ने अपने
 *निजी सचिव महादेव देसाई* को किसानों की समस्या जाने के लिए बिजोलिया भेजा था  *1919 कांग्रेस अधिवेशन* में बिजोलिया आंदोलन का प्रस्ताव रखा गया था
⛏महाराणा फतेह सिंह ने
 *1919 में बिंदु लाल भट्टाचार्य*की अध्यक्षता में एक आयोग मेवाड़ भेजा था जिसमें *सीताराम दास और माणिक्य लाल वर्मा*को रिहा करने की बात कही थी  किसने *1919 में वर्धा (महाराष्ट्र)में राजस्थान सेवा संघ की स्थापना* की जिसे *1920 में अजमेर* स्थानांतरित कर दिया गया था इसी संस्था ने इस आंदोलन का संचालन किया था
⛏ कांग्रेस नेताओं के हस्तक्षेप से 
*1922  ई.ए.जी.जी. होलेंड व किसानों के बीच* समझौता हुआ जिसमें *84 में से 35 लाग माफ*कर दिए 1923 में पथिक को *विलियम ट्रेच*की रिपोर्ट पर गिरफ्तार किया गया था 1927 के बाद इस आंदोलन का नेतृत्व पथिक ने *फुर्सारिया ग्वालियर के पास मध्य प्रदेश* से किया था  1927 मैं जमुना लाल बजाज व हरिभाऊ उपाध्याय इस आंदोलन से जुड़े
⛏ इस आंदोलन से *माणिक्य लाल वर्मा हरिभाऊ उपाध्याय रामनारायण चौधरी जमुनालाल बजाज* आदि जुड़े हुए थ
⛏ 1931 मैं  जमनालाल बजाज व मेवाड़ के प्रधानमंत्री सुखदेव प्रसादके मध्य एक समझौता हुआ लेकिन यह समझौता सफल नहीं हुआ
⛏ *मेवाड़ के प्रधानमंत्री टी राघवाचारी जी*के प्रयासों से यह आंदोलन *1941* में समाप्त हो गया था
⛏ *1941* में मेवाड़ के प्रधानमंत्री TV राघवाचार्य ने *राजस्व विभाग के मंत्री डॉक्टर मोहन सिंह मेहता*को बिजोलिया भेज पर *किसानों की मांगे मान* कर उंहें जमीन वापस कर दी गई और इस *आंदोलन को खत्म* किया गया
*⛏1897* में बिजोलिया के अधिकांश *धाकड़ जाति*के किसान *गंगाराम धाकड़*की मृत्यु फौज में *गिरधारीपुरा गांव* में इकट्ठे हुए थे
*⛏हरियाली अमावस्या* के दिन 1917 में विजय सिंह पथिक द्वारा *उपरमाल पञ्च बोर्ड* की स्थापना की गई थी
*⛏1927* से बिजोलिया किसान आंदोलन के मुख्य नेता *माणिक्य लाल वर्मा* थे
*⛏अक्षय तृतीया के दिन 1932* को प्रातः 6:00 बजे *4000 किसानों*ने अपनी  *इस्तीफाशुदा* जमीनों पर हल चलाना प्रारंभ किया
⛏राजस्थान सेवा संघ द्वारा प्रकाशित *राजस्थान केसरी तथा नवीन राजस्थान* जैसे समाचार पत्रों में *बिजोलिया किसान आंदोलन के समर्थन* में क्रांतिकारी लेख छपे थे
⛏1941 में बिजोलिया किसान आंदोलन *जय हिंद एवं वंदे मातरम* के उद्घोष के साथ समाप्त हुआ.
⛏अंग्रेजी नियंत्रण से पूर्व *बिजोलिया की विशेष स्थिति* थी यह क्षेत्र *मराठा आक्रमण का सर्वाधिक शिकार*था जब भी मराठा मेवाड़ पर आक्रमण करते थे तो *बिजोलिया ठिकाना पहला शिकार* होता था
*⛏1894 मेरा गोविंद दास*की मृत्यु के उपरांत *किशन सिह* ठिकानेदार बनाओ जिसने किसानों के प्रति *नीति तथा जागीर के प्रबंधन* में परिवर्तन किया
⛏किसानों के *लाग के विरोध* से घबराकर *राव किशन सिह ने चँवरी लाग माफ* कर दिया इस विजय ने किसानों के *भावी असहयोग अहिंसात्मक आंदोलन* की आधारशिला रखी
*⛏पृथ्वी सिहं बिजोलिया का स्थाई निवासी नहीं* था इसलिए उसका बिजोलिया के किसानो के साथ कोई लगाव नहीं था और इस कारण उसने किसानों के साथ *निर्दयता पूर्वक व्यवहार किया और विभिन्न प्रकार के कर* लगाए पृथ्वी सिह *कामां (भरतपुर)* से बिजोलिया आया था इसका बिजोलिया के साथ कोई *परंपरागत संबंध* नहीं था
*⛏1919 में कांग्रेस के अमृतसर अधिवेशन* में बिजोलिया किसान आंदोलन संबंधित प्रस्ताव *बी जी तिलक* द्वारा रखा गया था किंतु *महात्मा गांधी व मदन मोहन मालवीय*के हस्तक्षेप के पश्चात यह प्रस्ताव वापस ले लिया गया
⛏बिजोलिया का *शुद्ध नाम विजयावल्ली* था बिजोलिया का *क्षेत्रफल* लगभग *100 वर्ग मील* था  बिजोलिया *उदयपुर राज्य* की *अ श्रेणी * की जागीर में से एक था बिजोलिया ठिकाने में *आंदोलन का मुख्य मुद्दा भू राजस्व निर्धारण और संग्रह की पद्धति*थी इस कार्य हेतु *लाटा एवं कुँता* पद्धति मुख्यतः प्रचलित थी  बिजोलिया आंदोलन *भारत वर्ष का प्रथम व्यापक और शक्तिशाली* किसान आंदोलन था
⛏बिजोलिया आंदोलन को *तीन चरणों में विभाजित* किया गया था 

  • प्रथम चरण *1897 से 1915 तक रावकृष्ण सिंह “”चँवरी कर””*   1913 में बिजोलिया ठीकाने में *अकाल* पड़ा था  
  • द्वितीय चरण *1916 से 1922 तक विजय सिंह*  बिजोलिया के *द्वितीय चरण* में *बारीसल* गांव में *किसान पंचायत बोर्ड* की स्थापना की गई पथिक* 
  • तृतीय चरण *1923 से 1941* तक *माणिक्य लाल वर्मा और रामनारायण चौधरी*बिजोलिया आंदोलन के *तृतीय चरण* में *माणिक्य लाल वर्मा* द्वारा *1938 में मेवाड में प्रजामंडल*की स्थापना की गई थी


⛏ बिजोलिया ठीकाने का संस्थापक *अशोक परमार*का मूल निवास स्थान *जगनेर (भरतपुर)* था  पृथ्वी सिंह की मृत्यु के बाद उसके पुत्र *केसरसिह* के नाबालिक होने के कारण मेवाड़ सरकार ने ठिकाने पर *मुरसमात (कोटऑफ वार्ड्स)*कायम कर दी 1907* में प्रसिद्ध क्रांतिकारी *शचिंद्र सान्याल और रासबिहारी बोस* के संपर्क में आने के बाद *भूपसिहं (विजयसिह पथिक)* ने क्रांतिकारी गतिविधियों में भाग लिया 
इस आंदोलन के समय *माणिक्य लाल वर्मा जी* द्वारा रचित *पंछीड़ा गीत* गाया जाने लगा राजस्थान सेवा संघ के नेतृत्व में 8 अक्टूबर 1921 को बिना कूंता किसानों ने फसल काट ली थी जनवरी 1927*में मेवाड़ के *बंदोबस्त अधिकारी श्री ट्रेंस*बिजोलिया आए थे      


*⛏1913 बिजोलिया ठिकाने में अकाल* पड़ा था *साधु सीताराम दास, ब्रम्हा देव और फतहलाल चारण* के नेतृत्व में 1000 किसान राव से मिलने उनके घर गए पर *राव*ने मिलने से मना कर दिया इस कारण किसानो ने *जागीर की भूमि पर हल नहीं*चलाया बल्कि *मेवाड़ की खालसा भूमि, ग्वालियर तथा बूंदी रियासत की भूमि*किराए पर ले कर उस पर हल चलाया *इस कारण*बिजोलिया जागीर में *अकाल*पड़ा था       

⛏बिजोलिया में सूखा पड़ने के बावजूद भी *प्रथम विश्व युद्ध*के लिए किसानों से *वारफण्ड का चंदा* वसूला जा रहा था जिसके कारण किसानों में *असंतोष भडका*इसके इसलिए विजय सिंह पथिक ने इस *आंदोलन का नेतृत्व (भाग)* किया
*⛏24 नवंबर 1931* को बिजोलिया के किसानों ने *उमाजी का खेरा*की सभा में एक प्रस्ताव पारित किया यदि उन की  *असिंचित भूमि उन्हें वापस* मिल जाती है तो वह *मेवाड़ के प्रजामंडल के आंदोलन*में भाग नहीं लेंगे इसलिए *मेवाड़ सरकार* ने किसानों को *प्रजा मंडल के आंदोलन से दूर*रखने के लिए उनके *समझौते को स्वीकार* कर लिया पर *अगले 2 वर्ष तक* किसानो को कोई राहत नहीं दी गई

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