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रोजगार खबर

What are the normalization rules (marks) which IBPS apply in her exam?

प्रिय विद्यार्थियों, आप सभी सरकारी नौकरी पाने हेतु प्रतिस्पर्धात्मक परीक्षाओं के लिए तैयारी कर रहें हैं और सबसे पहली चीज जिसकी हम परीक्षा आयोजित करने वाले निकायों से उम्मीद करते हैं वह है सभी उम्मीदवारों के लिए उचित प्रतियोगिता सुनिश्चित करना. हाल ही में, एसएससी ने 5 अगस्त से 23 अगस्त 2017 तक 43 शिफ्टों में सीजीएल 2017 के टीयर-1 की परीक्षा आयोजित की. विद्यार्थियों की प्रतिक्रिया के अनुसार, कई शिफ्टों में परीक्षा का स्तर बहुत सरल था, इसलिए विद्यार्थी दी गई समय सीमा में अधिक प्रश्नों को हल करने में सक्षम थे. लेकिन कुछ शिफ्टों में, प्रश्नों का स्तर लंबा और कठिन था. आयोग को परीक्षा के स्तर में इस तरह की असमानता पर विचार करना चाहिए और विद्यार्थियों के साथ न्याय करना चाहिए. लाखों छात्र सरकारी नौकरी पाने का सपना देखते हैं लेकिन परीक्षा आयोजित करने वाले अधिकारियों की लापरवाही की वजह से, छात्र सरकारी नौकरी प्राप्त करने के अपने सपनों को पूरा नहीं कर सकते हैं.

 

सीएटी, गेट, आईबीपीएस और रेलवे भर्ती बोर्ड जैसे परीक्षा आयोजित करने वाली केई अन्य प्राधिकारी पहले ही अंकों के सामान्यीकरण की प्रक्रिया को लागू कर चुके हैं ताकि सभी उम्मीदवारों को प्रतियोगिता में उचित मौका प्राप्त हो सके. आजकल बहुत सी परीक्षाएं विभिन्न स्लॉट में आयोजित की जा रही हैं. विभिन्न स्लॉट में परीक्षा आयोजित करने का अर्थ है कि परीक्षा के कठिनाई स्तर में एक भिन्नता होगी. इस मुद्दे से निपटने के लिए, परीक्षा आयोजित करने वाले प्राधिकारी वर्ग ने सामान्यीकरण की प्रक्रिया शुरू की है. Adda247 पर, हम एसएससी सीजीएल परीक्षा में सामान्यीकरण की प्रक्रिया का समर्थन करते हैं.
विभिन्न सत्रों के प्रश्नपत्रों में कठिनाई स्तर की भिन्नताओं (यदि कोई हो) को ध्यान में रखने हेतु परीक्षा आयोजन समिति को एक उपयुक्त सामान्यीकरण विधि लागू करने की आवश्यकता है. सामान्यीकरण की प्रक्रिया एक सूत्र और प्राधिकरण द्वारा तय किए गए कुछ अन्य पैरामीटरों पर आधारित है, परीक्षा आयोजन समिति ने बहु-सत्र पत्रों के लिए सामान्यीकृत अंकों की गणना करने हेतु एक सूत्र व्युत्पन्न किया है. विभिन्न परीक्षा प्रारूप के लिए, अंक के सामान्यीकरण का एक अलग सूत्र है.
CAT परीक्षा प्राधिकरण ने घोषणा की है कि विभिन्न परीक्षण सत्रों के दौरान उम्मीदवारों के प्रदर्शन की तुलना में निष्पक्षता और इक्विटी सुनिश्चित करने के लिए, उम्मीदवारों के अंक, सामान्यीकरण की प्रक्रिया के अधीन होंगे. Normalization प्रक्रिया को कार्यान्वित किया जाना चाहिए, उसमें स्थान और विभिन्न रूपों में दिए जाने वाले अंक के पैमाने को समायोजित करना चाहिए और इस प्रक्रिया से प्राप्त स्केल स्कोर को शॉर्टलिस्टिंग के प्रयोजनों के लिए रूपांतरित किया जाएगा. कई सत्रों में कैट सेंटर 2016 राज्यों में सामान्य प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल किए जाते हैं, “सामान्यकरण की प्रक्रिया कई रूपों में उम्मीदवार के अंकों की तुलना करने के लिए स्थापित किया गया एक अभ्यास है और भारत में आयोजित अन्य बड़े शैक्षिक चयन परीक्षणों जैसे Graduate Aptitude Test in Engineering (GATE) में अपनाई जाने वाली प्रक्रिया के समान है.

प्रिय विद्यार्थियों, चलिए सामान्यीकरण की प्रक्रिया को सरल तरीके से समझें. हम किसी भी दिन सीजीएल परीक्षा की तीन शिफ्टो का अध्ययन करेंगे. हमने 5 अलग-अलग उम्मीदवारों के दृष्टांत(SAMPLE) अंक ले लिए हैं.
S. No.Candidate-1Candidate-2Candidate-3Candidate-4Candidate-5
Shift-180859095100
Shift-2110115120125130
Shift-39095100105110

अब मान लीजिए कि शिफ्ट -1 के उम्मीदवार 80, 85, 90, 95 और 100 अंक प्राप्त करते हैं.
शिफ्ट -2 के उम्मीदवार  110, 115, 120, 125 और 130 अंक प्राप्त करते हैं.
शिफ्ट -3 के उम्मीदवार 90, 9 5, 100, 105, 110 अंक प्राप्त करते हैं.

जैसा कि आप प्रश्नपत्रों के स्तर के कारण भिन्न शिफ्टों में उम्मीदवारों के अंकों में भिन्नता देख सकते हैं. इसलिए, हम पहली शिफ्ट का माध्य ज्ञात करेंगे और वह 90 अंक होगा. फिर हम दूसरी शिफ्ट का माध्य ज्ञात करेंगे जो कि 120 अंक होगा. इस प्रकार, शिफ्ट-1 और शिफ्ट-2 के माध्य के मध्य का अंतर 30 है. यदि हम पहली शिफ्ट के उम्मीदवार के अंकों में 30 अंक जोड़ देते हैं, तो नए सामान्यीकरण अंक (80+30=110), (85+30=115), (90+30=120), (95+30=125) और (100+30=130) होंगे, जो अब शिफ्ट-2 के अंकों के बराबर होंगे. अब शिफ्ट-1और शिफ्ट-2 के अंक बराबर होंगे.

उसी प्रकार, हम दूसरी शिफ्ट और तीसरी शिफ्ट के अंकों का सामान्यीकरण कर सकते हैं. दूसरी शिफ्ट में, अंकों का माध्य 120 है, तीसरी शिफ्ट में, अंकों का माध्य 100 होगा, इसलिए माध्य अंक का अंतर 20 है, यदि हम शिफ्ट-3 के उम्मीदवारों के अंकों में 20 अंक जोड़ देते हैं, तो (90+20=110), (95+20=115), (100+20=120), (105+20=125) और (110+20=130) अंक प्राप्त करेंगें.

अब जैसा कि आप देख सकते हैं, शिफ्ट-2 और शिफ्ट-3 के अंक समान (सामान्यीकृत) हैं. तो हमारे अनुसार, यह सामान्यीकरण को समझने का सबसे आसान तरीका है. इस विधि को माध्य विधि कहा जाता है .हम किसी विशेष शिफ्ट के सभी उम्मीदवारों के अंकों का माध्य ले सकते हैं, और अन्य शिफ्टों के उम्मीदवारों के अंकों के साथ इसकी तुलना कर सकते हैं, और फिर हम माध्य के अंतर को सबसे कम शिफ्ट के अंकों जोड़ते हैं. हमें उम्मीद है कि इससे प्रतिस्पर्धी परीक्षा में सामान्यीकरण की प्रक्रिया को समझने में मदद मिलेगी. हम स्थिति का संज्ञान लेने और सभी एसएससी परीक्षाओं में अंकों के सामान्यीकरण करने हेतु एसएससी से जोरदार आग्रह करते हैं.

 

Whenever IBPS Release Notification they mention this line “Exam will be in multiple shift and the ‘corrected-scores’ obtained by each of the candidates in different sessions (if held) will be normalized using equipercentile method.”

What Is Normalization ?

‘Normalisation’ is a process which IBPS employs in order to evaluate the performance of the candidates on the basis of similar exam parameters, especially difficulty level.

The exams conducted by Institute of Banking Personnel Selection often take place in various shifts. The sectional and overall level, as well as the topics, vary for each slot. The questions may be easier in one slot and comparatively difficult in the other.

So, for the fair evaluation of the exam marks of candidates, IBPS normalises the scores obtained by the candidates in the different shifts of this exam. Basically, normalisation aims to adjust the difficulty level across different sessions of the exam.

Example of Normalization Process

Let us assume there are 20 candidates appearing in the exam in the first shift which has an easier question set. In this easier set suppose the top scorer is Shatakshi with 49 out of 50 and a percentile of 100%.

Percentile Rank can be calculated by:

Now let us say that the second shift has 24 students which have a difficult question set.

Let us say that the highest marks scored in this shift are by Kriti with 25 out of 50.

Now for both the difficult and easier shifts percentile rank is generated. Now according to the Percentile Rank of the candidates in both the shifts candidates are selected. An overall rank sheet is made and candidates can see their overall rank. So if a candidate gets a difficult paper it doesn’t matter because scores get normalized to adjust the difficulty level and then ranked according to the percentile of the candidate.

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